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आलू चौपट: संकट में किसान

आलू चौपट: संकट में किसान

उत्तरप्रदेश, देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है। यहां लगभग 6 से 7 लाख हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती होती है तथा करीब 21 लाख टन वार्षिक उत्पादन होता है। देश के कुल आलू उत्पादन का लगभग एक-तिहाई (33 प्रतिशत) हिस्सा उत्तर प्रदेश में पैदा किया जाता है। विडंबना यह है कि सर्वाधिक आलू उत्पादन करने वाले किसान ही सबसे बड़े मूल्य संकट का सामना कर रहे हैं। भारी घाटे के कारण आलू उत्पादक किसान आर्थिक बर्बादी का शिकार होरहे हैं। 1000₹ से 1200 रुपये प्रति क्विंटल लागत आने के बावजूद, कुछ अपवादों को छोड़कर किसानों को मात्र 500 से 900 रुपये प्रति क्विंटल तक ही भाव मिल पाता है। बीज, कीटनाशक, खाद, डीजल, सिचाई, तथा अमोनिया गैस की बढ़ती कीमतों ने किसानों के संकट को और गहरा कर दिया है।

आलू की फसल के संबंध में केंद्र और राज्य सरकार की कोई स्पष्ट नीति  ही नहीं है। आलू को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वाली फसलों की सूची में शामिल नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप आलू उत्पादक किसानों को सरकार की ओर से कोई संरक्षण या राहत प्राप्त नहीं होती। बढ़ती लागत के अनुरूप उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं और लगातार घाटे की वजह से कई किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में शीतगृहों (कोल्ड स्टोरेज) को पूर्व में ही  सुश्री मायावती सरकार ने नियंत्रणमुक्त कर दिए जाने के कारण  शीतग्रह संचालकों को मनमाना भंडारण शुल्क वसूलने की छूट मिल गई है। वर्तमान सीजन में आलू भंडारण का शुल्क लगभग 280 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

आलू उत्पादक किसानों के बढ़ते आर्थिक संकट को देखते हुए उत्तर प्रदेश किसान सभा की आलू उत्पादक समिति आगरा द्वारा 7 जून 2026 को समसाबाद कस्बे में आलू उत्पादक किसानों का  कन्वेंशन आयोजित किया गया, जिसमें में किसानों को राहत दिलाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया तथा सरकार से मांगें  करते  हुए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई है।

कन्वेंशन में पारित प्रस्ताव में केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की गई कि,आलू को एमएसपी वाली फसलों की सूची में शामिल किया जाए तथा एम. एस. स्वामीनाथन कृषि आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी2+50 प्रतिशत (लागत का डेढ़ गुना) मूल्य( 1650 ₹ प्रति कुंतल) निर्धारित कर सरकारी खरीद की गारंटी की जाए, इसके अतिरिक्त आलू भंडारण दरों में राहत, आलू निर्यात हेतु रेल एवं सड़क भाड़े में छूट तथा सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराने, आलू उत्पादक क्षेत्रों में आलू आधारित लघु उद्योग स्थापित करने, आलू की  खपत बढ़ाने के लिए मिड डे मील,  सरकारी राशन की दुकानों  से आलू वितरण,अमोनिया गैस की कमी दूर करने तथा कम भाव मिलने के कारण घाटा झेल चुके/ रहे किसानों को मुआवजा देने जैसी प्रमुख मांगें उठाई गईं। सम्मेलन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं करती है तो किसानों को व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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