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खरीफ एमएसपी: किसानों के साथ एक और विश्वासघात

खरीफ एमएसपी: किसानों के साथ एक और विश्वासघात

भाजपा-नीत केंद्र सरकार ने एक बार फिर 2026 के खरीफ मौसम के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में मामूली वृद्धि की घोषणा करके देश के किसानों के साथ धोखा किया है और कृषि संकट को बढाने का ही  किया है । भाजपा-नीत केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप व्यापक उत्पादन लागत (सी2) पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर एमएसपी देने के अपने वादे से मुकरते हुए किसानों को निराश किया है।

देश भर के किसान पहले से ही बीज, उर्वरक, कीटनाशक, डीजल, पेट्रोल, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनरी की लगातार बढ़ती कीमतों के बोझ तले दबे हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे उत्पन्न आर्थिक प्रभावों का पूरा बोझ किसानों और आम जनता पर डाला जा रहा है। खाद की कीमते कृत्रिम रूप से बधाई जा रही है, जमाखोर और कालाबाज़ारिए मुनाफाखोरी कर रहे हैं, जबकि सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। ऐसे समय में किसानों को राहत देने के बजाय एमएसपी में नगण्य वृद्धि करना सरकार की किसान-विरोधी मानसिकता का प्रमाण है।

केंद्र सरकार द्वारा घोषित एमएसपी आज भी ए2+एफएल लागत के आधार पर तय किया गया है, जबकि किसान संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि एमएसपी की गणना व्यापक उत्पादन लागत (सी2) के आधार पर की जाए और उस पर कम-से-कम 50 प्रतिशत लाभ जोड़ा जाए। वास्तविकता यह है कि घोषित एमएसपी किसानों को उनकी लागत तक की भरपाई नहीं कर पा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसल धान के लिए एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जबकि सी2+50 प्रतिशत के आधार पर यह 3,243 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था। इसका अर्थ है कि किसानों को प्रत्येक क्विंटल पर 802 रुपये का सीधा नुकसान होगा। भाजपाशासित राज्य हरियाणा ने धान की उत्पादन लागत 2,696 रुपयेआंकी है और उस पर ₹2,996 के एमएसपीकी मांग की गई और महाराष्ट्र ने धान उत्पादन लागत 4,291 रुपये आंक कर 4,888 रुपये के एमएसपीकी मांग की थी। इसी तरह, मक्के के लिए एमएसपी2,410रुपये है, जबकि सी2+50% कीमत 2,995.5रुपयेबनती है, जिससे किसानो को प्रति क्विंटल 585.5रुपये का नुकसान होगा। बाजरा किसानों के लिए प्रति क्विंटल यह नुकसान 634 रुपये और ज्वार की खेती में प्रति क्विंटल 1,173 रुपये होगा।

दालों और तिलहन के मामले में स्थिति और भी चिंताजनक है। अरहर (तुअर) के लिए एमएसपी 8,450 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जबकि सी 2+50% के हिसाब से कीमत 10,995 रुपये होनी चाहिए; यानी किसानों को प्रति क्विंटल 2,545 रुपये का नुकसान हो रहा है। उड़द के किसानों को प्रति क्विंटल 2,232.5 रुपये और मूंग के किसानों को 1,856.5 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ेगा। तिलहन उगाने वाले किसानों के साथ भी भारी अन्याय हो रहा है। मूंगफली किसानों को 1,820.5 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन किसानों को 1,610.5 रुपयेप्रति क्विंटल, सूरजमुखी किसानों को 1,867.5 रुपयेप्रति क्विंटल, तिल के किसानों को 3,266.5 रुपये और रामतिल (निगरसीड) उगाने वालों को 2,359 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना होगा। नई घोषित एमएसपीव्यवस्था के तहत कपास किसानों को 2,357.5 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान होगा। महाराष्ट्र में सोयाबीन की अनुमानित उत्पादन लागत 6,265 रुपये है, और इसी आधार पर राज्य सरकार ने 7,184 रुपये कीएमएसपीकी मांग की है। हालांकि, यह जानते हुए भी कि सोयाबीन किसान पहले से ही संकट का सामना कर रहे हैं और आत्महत्या करने को मजबूर हैं, एमएसपीको इतना कम रखना मोदी सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

ये आंकड़े सरकार के उन दावों की पोल खोलते हैं कि किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिल रहा है। यह अनुमान भी सरकारी तौर पर तय की गई लागत पर आधारित हैं, जबकि असल में बीज, खाद, कीटनाशक, डीज़ल, बिजली, सिंचाई, मशीनरी और मज़दूरी की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण किसानों को खेती का खर्च कई गुणा बढ़ा है।घोषित एमएसपी का एक बड़ा हिस्सा केवल कागजों तक सीमित रहता है क्योंकि अधिकांश राज्यों में सरकारी खरीद व्यवस्था बेहद कमजोर है। बड़ी संख्या में किसानों को मजबूर होकर एमएसपी से कम कीमतों पर अपनी उपज बेचनी पड़ती हैं। इसलिए केवल एमएसपी की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी कानूनी गारंटी और सार्वभौमिक सरकारी खरीद सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

फसलउत्पादन लागत (रु./क्विंटल) 2026-27: ए2+एफ एलउत्पादन लागत (रु./क्विंटल) 2026-27: सी2सरकार द्वारा  2026-27 के लिए घोषित एमएसपीएमएसपी 2025-26सी2+50%के अनुसार अनुमानित लागतघोषित एमएसपीऔर सी 2+50 के बीच का अंतर (किसानों को नुकसान)
धान16272162244123693243802
ज्वर268234644023369951961173
बाजरा18582356290027753534634
मक्का14441997241024002995.5585.5
रागी347043085205488664621257
अरहर (तुर)5496733084508000109952545
मूंग543870918780876810636.51856.5
उड़द541869558200780010432.52232.5
मूंगफली50116225751772639337.51820.5
सोयाबीन38054879570853287318.51610.5
सूरजमुखी556268078343722110210.51867.5
तिल6897907510346984613612.53266.5
रामतिल67018274100529537124112359
कपास551170838267771010624.52357.5

देश के किसान इन किसान-विरोधी नीति की कड़ी निंदा करते रहे है और मांगें कर राहे है कि,स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी2+50 प्रतिशत पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए।सभी फसलों की सुनिश्चित सरकारी खरीद की व्यवस्था की जाए तथा सभी राज्यों में सार्वजनिक खरीद अवसंरचना का विस्तार किया जाए।उर्वरक, बीज, डीजल, बिजली और सिंचाई सहित सभी कृषि आदानों की लागत कम करने के लिए पर्याप्त सब्सिडी और सरकारी सहायता प्रदान की जाए।भूमिहीन, गरीब, मध्यम किसान तथा बटाईदार किसानों के लिए व्यापक ऋणमाफी लागू की जाए।कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट घरानों और कृषि-व्यवसाय कंपनियों के पक्ष में बनाई गई किसान-विरोधी नीतियों को वापस लिया जाए।

इन किसान-विरोधी और कॉरपोरेट-परस्त नीति के विरुद्ध व्यापक एकता कायम करें तथा लाभकारी मूल्य, कर्ज़मुक्ति, सुनिश्चित खरीद और कृषि के जनतांत्रिक पुनर्गठन के लिए संघर्ष को और तेज़ करने की जरुरत है। किसानों की आजीविका को बचने, देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि के भविष्य की रक्षा के लिए संगठित जनसंघर्ष ही एकमात्र रास्ता है।

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