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हरियाणा: संघर्ष के दम पर जीत की तरफ बढ़ते कदम
प्रदेश भर में भाजपा सरकार की किसान मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ किसान सभा हरियाणा लगातार सड़कों पर है चाहे वो संयुक्त किसान मोर्चा का आंदोलन हो या किसान सभा के स्वतंत्र संघर्ष हो । किसानों की समस्याओं को लेकर पिछले दिनों से जारी आंदोलन जीत की दिशा में बढ़े हुए कदम है ये जीत किसान सभा के उन सैकड़ों कार्यकर्ताओं और किसानों की मेहनत का परिणाम है जिन्होंने आंदोलन को मजबूत कर अपने हकों को हासिल किया । पिछले लगभग एक साल से भिवानी और दादरी में 350 करोड़ के बीमा क्लेम के लिए आंदोलन चला, ड्रेनों की मरम्मत, सफाई, फसल खराबे के मुआवजे के लिए आंदोलन किया गए ,रोहतक में नहर पक्की करने के विरोध में 20 दिन धरना चला ,बिजली की टावर लाइन के मुआवजे के लिए आंदोलन किए,सरकार द्वारा फसल खरीद के नए नियमों के खिलाफ आंदोलन किए गए जिसके चलते सरकार को झुकना पड़ा और किसानों के पक्ष में निर्णय करने पड़े ये संगठित किसान आंदोलन की जीत है
फसल बीमा क्लेम के लिए आंदोलन
लगभग पिछले एक साल से भिवानी, दादरी जिला का खरीफ 2023 के बकाया 350 करोड़ के बीमा क्लेम की मांग को लेकर आंदोलन जारी था जिसे क्षेमा बीमा कंपनी द्वारा नाजायज तरीके से क्रॉप कटिंग को मानने की बजाय सेटेलाइट रिपोर्ट को आधार बनाना चाहा और किसानों के जायज 350 करोड़ के बीमा क्लेम में से मात्र 90 करोड़ रुपए जारी कर इतिश्री कर दी । ये बीमा क्लेम 2023 की फसलों का था जिसकी क्रॉप कटिंग की रिपोर्ट भिवानी ,दादरी के कृषि विभाग ने फसल नुकसान के उपरांत बीमा कंपनी के कर्मचारियों की मौजूदगी में तैयार की जिसके बाद बीमा कंपनी को क्लेम डलवाने थे लेकिन जब बीमा कंपनी को लगा कि क्लेम ज्यादा बन रहा है तो उन्होंने बेवजह की आपत्तियां लगानी शुरू कर दी । जिसपर जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की मीटिंग हुई और उन्होंने बीमा कंपनी को क्लेम देने के लिए कहा ।परंतु बीमा कंपनी अपनी तानाशाही पर अड़ी रही और क्लेम न देना पड़े इसके लिए तिकड़मबाजी करती रही और गलत तरीके से हैडक्वाटर पर स्टेट टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग का एजेंडा बना इस क्लेम को रफा दफा करने का काम किया गया । ये मीटिंग जिसमें इसे एजेंडा बनाया गया वो बिना कोरम के और चुनाव आचार संहिता लगने के बाद की गई ताकि मामले को किसी भी तरह रफ़ दफा किया जा सकें ।
इस पूरे मामले की तह तक जाते हुए किसान सभा के साथियों ने आरटीआई के माध्यम से तमाम दस्तावेज को एकत्रित किया जिसमें उच्च अधिकारियों और बीमा कंपनियों की मिलीभगत शामिल थी। सरकार की भी कोई इच्छा इस बीमा क्लेम को किसानों को दिलाने की नहीं थी।
जिसपर किसान सभा भिवानी जिला के साथियों ने चर्चा करते हुए इस मुद्दे पर आन्दोल खड़े करने का निर्णय लिया। आंदोलन की तैयारी से पहले गांव गांव जाकर लोगों से चर्चा की है और आंदोलन के लिए तैयार किया। आंदोलन की शुरूआत में 19 मार्च और फिर 15 जून को दो पंचायतें करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए और फिर 16 जुलाई को किसान सभा के नेतृत्व में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले बड़ा प्रदर्शन करते हुए एसडीएम कार्यालय में अनिश्चितकालीन पड़ाव लगाया गया जो दिन रात चला। इसके अगले हो दिन दादरी में धरना शुरू किया गया।
पड़ाव में हजारों साथियों ने हिस्सा लिया और फिर सैकड़ों साथी दिन रात धरने पर बैठे रहे। आंदोलन की मजबूती के लिए समय समय पर जनअभियान चलाया गया और पड़ाव के दौरान विभिन्न अवसरों पर बड़ी लामबंदी की गई।
विधानसभा और संसद में बीमा क्लेम की आवाज उठाने के लिए विधायकों और सांसदों को ज्ञापन सौंपे गए जिसके चलते ये मांग देश प्रदेश के किसानों के प्रमुख मुद्दे के तौर पर स्थापित हुई ।
28 नवंबर 2025 को एक महापंचायत एसडीएम कार्यालय में की गई जिसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम ,इंद्रजीत समेत राज्य भर के पदाधिकारियों ने शिरकत की । इस पंचायत के बाद मामले की तकनीकी गंभीरता को देखते हुए इस मुद्दे को राज्य शिकायत निवारण आयोग में रखा गया जिसकी चार बार सुनवाई के बाद कमेटी को किसानों के हक ने निर्णय करना पड़ा और बीमा कंपनी को 14 दिन में क्लेम देने का आदेश देना पड़ा। जो कि किसानों की बड़ी जीत है इसके बाद आंदोलन को स्थगित किया गया अगर बीमा कंपनी क्लेम नहीं देती है तो आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा और क्लेम का एक एक रुपए की लड़ाई को लड़ा जाएगा। । आंदोलन के दौरान स्थानीय मुद्दों को लेकर हस्तक्षेप करते तमाम आंदोलन के आवाहन को लागू किया गया ।
बाढ़ ,जलभराव ,ड्रेन की समस्या ,सेम के मुद्दों को लेकर आंदोलन
पिछले कई वर्षों से प्रदेश में किसान जलवायु परिवर्तन और मौसम की बड़ी भारी मार झेल रहे हैं । खेती में हर साल कहीं सूखे की मार ,कहीं ओलावृष्टि होने , बेमौसमी अत्यधिक बारिश होने ,जलभराव होने से और पानी की निकासी के समुचित प्रबंधों के न होने से हर साल प्रदेश के किसी न किसी जिले में फसलों में बड़ा भारी नुक्सान होता है । विशेषकर 5 -6 सालों से प्रदेश के लोग अभूतपूर्व बाढ़ के हालात का सामना कर रहे हैं। अब खरीफ 2025 के इस पिछले सीजन में प्रदेश में बारिश और जलभराव होने से हिसार,हांसी,फतेहाबाद,सिरसा,कैथल,भिवानी,जींद,दादरी,पलवल, झज्जर,रेवाड़ी,महेंद्रगढ़,रोहतक आदि जिलों में बड़ा भारी नुकसान हुआ था। उस समय इन जिलों का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ की चेपट में आ गया था जिससे दर्जनों गावों,बस्तियों में पानी भर गया था,खेत पूरी तरह से जलमग्न होने से धान,कपास,बाजरे और सब्जियां व अन्य फसलों में भारी नुकसान था। किसानों ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण करवा 31 लाख एकड़ में फसल नुकसान होना दर्ज करवाया था। फसलों की तबाही के पीछे केवल बारिश ज्यादा होना ही तबाही का कारण नहीं था बल्कि सरकार के पानी की निकासी के प्रबंध अधूरे थे । लगभग सभी जिलों में पानी की निकासी के लिए जिन ड्रेनों का निर्माण किया गया था उनकी देखभाल न होने, जिसमें उसकी साफ सफाई, गाद निकालना ,बांध पक्के करने का कोई प्रबंध नहीं किये गए, जिसके चलते अनेकों जगह पर ड्रेनें टूटी , ड्रेन ओवरफ्लो हो गई जिससे स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई । उस दौरान ये भी देखने को मिला कि प्रशासन एवं सरकार द्वारा पानी की निकासी के पर्याप्त साधनों के न होने के चलते महीनों पानी खड़ा रहा और सबसे खराब हालत बारिश के पानी को ड्रेन के माध्यम से जिस घग्गर नदी में डालना था वहां पानी को लिफ्ट करने के लिए कोई पंप सेट नहीं था जिसने हालात और जायद बिगाड़े और पानी निकलने की बजाय वापिस चल कर लोगों को डुबोने का काम किया। हालत तो ये थी कि समय रहते पानी की निकासी न होने से हजारों एकड़ में रबी की फसलों की बिजाई भी नहीं हो पाई थी।
लेकिन सरकार द्वारा किसानों को जो मुआवजा दिया गया वो कुल 31 लाख एकड़ के पंजीकरण में से मात्र 1 लाख 20 हजार एकड़ का ही नुकसान माना ।
मुआवजे को लेकर आंदोलन
सरकार ने बड़ी चालाकी से किसानों को मुआवजा न देना पड़े इसके लिए फसल खराबे की फोटो की आपत्तियां लगानी शुरू की । इसके साथ ही अगर सांझी खेवट में एक हिस्सेदार ने फसल का बीमा कराया था तो सभी हिस्सेदारों को बीमित मान मुआवजे देने से वंचित कर दिया । किसान सभा हरियाणा ने इस मुद्दों को उठाते हुए डुप्लीकेट फोटो की आपत्तियां और गलत बीमित दिखाए गए किसानों को मुआवजे की मांग को लेकर जिलों में धरने व प्रदर्शन किए। कई बार जिला उपायुक्त कार्यालयों पर प्रदर्शन करने पड़े । प्रदर्शनों के चलते सरकार को डुप्लीकेटर फोटो की आपत्ति शर्त को हटाना पड़ा और मुआवजे के 375 करोड़ रुपए और जारी करने पड़े । हालांकि अभी जिन किसानों ने फसलों के बीमा नहीं करवाया और उन्हें बीमित दिखा मुआवजे से वंचित कर दिया उनका मुआवजा बकाया है उसके लिए संघर्ष जारी है।
किसान मजदूर पंचायतों के चलते हुए ड्रेन की सफाई
किसान सभा हरियाणा न तय किया कि ड्रेनों की सफाई ,पानी को लिफ्ट करने के लिए पंप सेट,सेम की समस्या, सिरसा के ओटू हैंडवर्कस पर गेट निर्माण,पानी की निकासी के पुख्ता प्रबंध आदि की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएं। इसके लिए सबसे पहले 27 अप्रैल को हिसार जाट धर्मशाला में 6 जिलों के चुनिंदा कार्यकर्ताओं की कन्वेंशन की गई इस कन्वेंशन में 150 के लगभग साथियों न हिस्सा लिया और इस मुद्दे के समग्र आयामों पर एक नोट भी प्रस्तुत किया गया। कन्वेंशन के बाद एक मांग पत्र अधीक्षक अभियंता सिंचाई विभाग हिसार को सौंपा गया । कन्वेंशन में आवाहन किया गया की अगर समय रहते प्रशासन द्वारा इस समस्या को हल करने के कदम नहीं उठाएं गए तो इस ड्रेन पर लगते गावों में पंचायतें की जाएंगी और ड्रेन के अंतिम छोर पर सिरसा में बड़ी लामबंदी करते हुए सिंचाई मंत्री के आवास पर प्रदर्शन किया जाएगा।
लेकिन जैसा कि सरकार का चरित्र है हर साल करोड़ों रूपए जिस काम के जारी किए जाते हैं उन्हें राजनेता और भ्रष्ट अधिकारी हजम कर जाते हैं । इसलिए हिसार जिले के आर्य नगर में पहली पंचायत का आयोजन किया जिसके दबाव में एक दिन पहले ही सारा प्रशासन ड्रेन पर पहुंच गया और सफाई के कार्य का जायजा लेने लगा। ये किसानों का दबाव ही था जिसने प्रशासन को सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बाध्य कर दिया। इसके बाद अगली पंचायत हिसार जिला के गाँव कालीरावण ,चूली खुर्द,दाहिमा, बधावड़, फतेहाबाद के जांडवाला, सिरसा के शकरमंदौरी में की गई जहां जहां भी पंचायत हुई वहां वजह प्रशासन ड्रेनों की सफाई के लिए मशीनों को लेकर ड्रेन पर पहुंचे मिले। इन पंचायतों में प्रशासन और मौके के अधिकारी पहुंच जाते थे । समय पर समस्या में हस्तक्षेप की पहकदमी से हुई पंचायतों के दबाव ने ही विपक्ष की राजनैतिक पार्टियों ने भी भी समर्थन दिया और कई पंचायतों के प्रतिनिधि एवं विपक्ष के विधायक पहुंचे। पंचायतों में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया।
हिसार,फतेहाबाद, सिरसा में गावों की पंचायतें करते हुए 3 जून को राज्य की बड़ी महापंचायत घग्गर नदी के हैंडवर्कस पर ओटू हेड के ऊपर की गई जिसमें 1500 के लगभग साथियों ने हिस्सा लिया । मौजूदा विधायक और पार्टियों ने इस मुद्दे पर समर्थन दिया । ओटू पर हुई पंचायत में आए प्रशासनिक अधिकारियों को बाध्य किया कि वो पानी को लिफ्ट करने के लिए पंप सेट लगाएगा और ड्रेन में गेट भी लगाए जाएंगे। किसान सभा ने तय किया है कि अगर 22 जून तक समाधान नहीं होता तो 25 जून को सिंचाई मंत्री का घर घेरा जाएगा।
इन तमाम पंचायतों में किसान सभा हरियाणा के नेतृत्व के साथ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह,और भादरा के पूर्व विधायक एवं किसान सभा के नेता बलवान पूनिया का विशेष रूप से उल्लेखनीय योगदान रहा।
नहर पक्की करने के विरोध में धरना
रोहतक जिला में भालौठ सब ब्रांच नहर को कंक्रीट से पक्का करने के खिलाफ 4 गावों के किसानों द्वारा 20 दिन तक धरना लगा कर सरकार की इस गलत नीति का विरोध किया गया जिसमें किसान सभा का नेतृत्व प्रमुखता से शामिल रहा।
नहर पक्की करने का विरोध क्यों ?
सिंचाई विभाग और सरकार द्वारा टेल पर पानी पहुंचाने का नाम लेकर नहरों को आरसीसी का 8 इंच सीमेंटेड मैटिरियल डाल कर पक्का किया जा रहा था काफी नहरें पहले ही पक्की की जा चुकी हैं। लेकिन पिछले 10 सालों में इन नहरों की जितनी इनकी क्षमता है उतना पानी नहीं छोड़ा गया पानी में लगातार कटौती की जा रही है । न ही नहरों की सफाई की गई हालांकि सफाई के नाम पर बजट तो जारी होता है। किसानों का मानना है कि नहर को पक्का करने से हो सकता है थोड़ा बहुत पानी आगे पहुंच जाएं लेकिन जहां जहां नहर पक्की होगी वहां के भू जल संसाधन बिल्कुल खत्म हो जायेंगे। इसलिए किसानों के कहना है कि नहर को साइड से बेशक पक्का कर लिया जाए और नीचे से कच्चा छोड़ दिया जाए। क्योंकि अगर नहर को नीचे से कंक्रीट और सरिया डाल कर पक्का किया जाता है तो आस पास के गावों के लिए न तो पीने का पानी न ही सिंचाई के लिए पानी बचेगा । अभी नहर ब्लॉक की ईंटों से पक्की है जिससे पानी का रिसाव होता रहता और भूमिगत पानी रीचार्ज होता रहता है जिससे नहरों पर लगे नलके और ट्यूबवेल स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाते है । इसलिए किसानों ने धरना लगाते हुए सारे काम को रुकवा दिया और मुद्दों को हल करने की मांग की।
पीने के पीने के लिए नहरों पर लगे नलकों पर निर्भर है गांव की आबादी। गावों में पीने के साफ पानी की बड़ी भारी समस्या है ज्यादा लोग घरों तक साफ पानी की सप्लाई न होने के चलते पीने का पानी नहर पर लगे नलको से लाते है और उसे से काम चलता है ।
आंदोलन के चलते किसानों की मांगों के आगे विभाग को झुकना पड़ा।किसानों द्वारा नहर की तली को कच्चा रखने के लिए 20 दिन तक नहर पर 5 जगह धरने लगे और जिसके दबाव में प्रशासन को झुकना पड़ा और सिंचाई विभाग के बड़े अधिकारियों की उपस्थिति में धरना कमेटी के साथ वार्ता की। उन्होंने नहर को दोनों तरफ से पक्का करते हुए तली को 10 -10 फुट तक दोनों तरफ पक्की करने और नीचे की 50 फुट की तली की केवल टूट फूट को ठीक करते हुए पहले की अवस्था में रखने का आश्वासन दिया। प्रशासन की मंशा नहर के दोनों तरफ 2 एकड़ में लगे सभी ट्यूबवेल को हटाने की भी थी लेकिन आंदोलन के दबाव में प्रशासन को उससे भी पीछे हटना पड़ा। आंदोलन गांव के साथियों के नेतृत्व में संयुक्त था जिसमें किसान सभा रोहतक की टीम का नेतृत्वकारी योगदान रहा।
हाई टेंशन पावर लाइन के उचित मुआवजे के सवाल पर आंदोलन
आज दिल्ली एनसीआर की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने ,राजस्थान में ग्रीन एनर्जी के नाम पर हजारों एकड़ जमीनों को अदाणी के हाथों में देकर बड़े बड़े सोलर प्लांट्स लगने का काम चल रहा है ।इस बिजली को आगे लेकर जाने के लिए हरियाणा प्रदेश में बिजली की हाई टेंशन पावर लाइनों का ऐसा जाल बिछाया जा रहा जिससे आने वाले समय में किसानों के खेतों में चारों तरफ बड़े बड़े खम्बे और तार ही तार दिखेंगे । सरकार बड़ी कंपनियों को मुनाफे पहुँचाने के लिए आने पौने दामों पर जबरदस्ती किसानों की बेशकीमती जमीनों में टावर लगाने का काम कर रही है जिसके चलते किसानों के खेतों की आने वाले समय में कोई वैल्यू नहीं रहेगी न ही ढंग से खेती हो पाएगी । हाई टेंशन पावर लाइनों के बदले किसानों ने लड़कर केंद्र सरकार से कानून बनवाया था हालांकि उसमें अभी भी अनेकों किसान पक्षीय प्रावधानों की कमी है लेकिन उस पूरे कानून को समग्रता में लागू करने की बजाय मनमर्जी के रेट तय कर रहा है ।इसलिए इस मुद्दे पर भी किसान सभा की भिवानी जिला कमेटी ने उचित मुआवजे की मांग को लेकर विशाल धरने का आयोजन डीसी भिवानी कार्यालय पर किया जिसके दबाव में प्रशासन को झुकना पड़ा और दोबारा वैल्यूवर नियुक्त करने पड़े। हालांकि अभी तक सही कीमत किसानों को नहीं दी गई जिसके खिलाफ आंदोलन जारी है।