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31 मार्च जींद ललकार रैली: हरियाणा में जुझारू रोष कारवाई
24 फरवरी को कुरुक्षेत्र में संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कांउसल की जनरल बॉडी मीटिंग जो महत्वपूर्ण निर्णय हुए उनमें 13 अप्रैल से पहले सभी प्रदेशों में लंबित मुद्दों पर बड़ी महापंचायत करना था। दूसरा निर्णय यह था कि पार्लियामेंट का सेशन जब बजट बहस के लिए 9 मार्च को शुरू होगा उसी दिन जंतर-मंतर पर ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त किसान मोर्चा एक समानांतर सेशन का आयोजन करेगा जिसमें अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को नकारने और लेबर कोड, वि. बी. जी राम जी, बिजली संशोधन बिल व बीज बिल आदि को वापस लेने की मांगें उठाई। 9 मार्च के किसान मजदूर संसद कार्यक्रम को विफल करने की तमाम कोशिशें सरकार ने की जिनके तहत दिल्ली पुलिस ने कुल संख्या पर सीमाएं थोप दी और आयोजन को जल्दी समाप्त करने का भी दबाव बनाने की चेष्टा की।
उधर हरियाणा पुलिस ने कुछ स्थानों पर किसान सभा और अन्य किसान नेताओं को दिल्ली जाने से रोकने के लिए उन्हें घरों पर ही हिरासत में ले लिया और दोपहर बाद ही पुलिस वापिस गई। इनमें किसान सभा हिसार जिले के सचिव कामरेड सरबत पूनिया और संयुक्त किसान मोर्चा के हिसार जिला संयोजक सरदानंद राजली को भी उनके गांव के घर पर हाउस अरैस्ट रखा गया। इसके बावजूद समांनांतर संसद का आयोजन सफल रहा ।
जींद महापंचायत अपने आपमें एक शानदार आयोजन रहा । मंडी का शेड पूरी तरह भर गया। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता जोगेंद्र सिंह उगराहां जी किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, राज्य प्रधान मास्टर बलबीर, राज्य सचिव सुमित, रत्न मान, कंवरजीत, जोगेंद्र नैन, सुखदेव जम्मू विकास सीसर, मास्टर सतीश, तेजेंद्र थींद आदि मौजूद रहे। उगराहां जी ने अपने संबोधन में कहा कि देश की कारपोरेट परस्त सरकार ने राष्ट्रीय हितों की तिलांजलि देते हुए अमेरिका से जो डील किया है वह साम्राज्यवाद के सामने समर्पण है। उन्होंने आह्वान किया कि इसको परास्त करने के लिए देश भर में शक्तिशाली किसान मजदूर आंदोलन का निर्माण जरूरी है। इंद्रजीत सिंह ने ईरान के ऊपर इजराईल और अमेरिका के विध्वंशकारी आक्रमण की निन्दा करते हुए कहा कि साम्राज्यवादी अमेरिका खाड़ी के तेल पर कब्जा जमाने के लिए मानवता के खिलाफ आपराधिक युद्ध चला रहा है। ठीक उसी प्रकार वह भारत के प्राकृतिक संसाधनों और कृषि मार्केट में अपने उत्पाद झोंकना चाहता है। लेकिन ईरान तो बड़ी की़मत चुकाते हुए भी साम्राज्यवाद का मुकाबला कर रहा है पर मोदी सरकार शर्मनाक समर्पण के रास्ते पर चल रही है। इस गद्दारी के खिलाफ और भारत की संप्रभुता की हिफाजत में किसान मजदूरों और सभी देशभक्त लोगों को खड़ा होना पड़ेगा।

इस दौरान हरियाणा सरकार ने खरीफ फसलों की खरीद के लिए बहुत ही आपत्तिजनक निर्देश जारी करके किसानों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर दिया। सरकार के जनविरोधी कदमों से किसानों में रोष और भी गहरा हो गया। ध्यान रहे कि पकी हुई फसलों को प्राकृतिक आपदा के प्रकोप से भारी नुक्सान हो गया। बेमौसमी बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि से पूरे उत्तर भारत में गेंहू, चना, सरसों, मक्का, फल व सब्जियां चौपट हो गई। इस अवसर पर जरुरत तो यह थी कि मुआवजा, बोनस आदि दिया जाता और सरकारी खरीद को उदार बनाया जाता। लेकिन हरियाणा सरकार ने ऐसे निर्देश जारी कर दिए जिनसे मंडी में गेट पास लेने के लिए ट्रैक्टर की नंबर प्लेट सहित फोटो खिंचवाने, फसल पंजीकरण की पुष्टि करवाने और आधार कार्ड के अनुसार वास्तविक किसान का अंगूठा लगवा कर बायोमीट्रिक पहचान करवाना अनिवार्य किया गया है। हरियाणा सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे किसान अनाज की बजाय कोई अफीम जैसा नशा बेच रहे हों। इसके अलावा नमी के कारण भी खरीद में देरी हो रही है। महापंचायत में घोषणा की गई कि अगर जिला उपायुक्त आधे घंटे तक खुद पंचायत के बीच आकर ज्ञापन लें, नहीं तो सभी लोग रोष स्वरूप सड़क पर बैठने को मजबूर हो जाएंगे। इस स्थिति में जिला उपायुक्त खुद महापंचायत के मंच पर आए और ज्ञापन लेकर गए।
ध्यान रहे कि हरियाणा में किसानों के ऊपर पहले ही कई तरह के पोर्टल थोपकर बहुत जटिल स्थिति पैदा कर रखी है। जैसे मेरी फसल –मेरा ब्योरा पोर्टल, परिवार पहचान पत्र और क्षतिपूर्ति पोर्टल आदि। इन पोर्टलों पर यदि किसी ने अपनी फसल अपलोड नहीं की तो उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मंडी में बेचने में दिक्कत आती है। इसी प्रकार मौसम के कारण यदि फसल खराब होती हैं और पोर्टल पर किसान नुकसान को को दर्ज़ नहीं करते तो नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता। ये पोर्टल प्रशासन की मर्जी से ही निश्चित अवधि तक ही संचालित होते हैं और बहुत बार बंद ही पाए जाते हैं।
हरियाणा सरकार का यह कहना है कि उसने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नए नियम बनाए हैं। ध्यान रहे कि पिछले सीजन में धान खरीद में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है जोकि प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकता। परंतु हरियाणा सरकार ने असली भ्रष्टाचारियों को पकड़ने की बजाय खरीद के नियमों में कडा़ाई से आम किसान को दंडित करने का काम किया है ।
वास्तविकता यह है कि ये तमाम हथकंडे फसल बिक्री को अतिरिक्त आमदनी दिखाते हुए परिवार पहचान पत्र में दर्ज हुई आमदनी में इसे जोड़ कर बुढ़ापा पेंशन, बी पी एल सुविधाएं और प्रधानमंत्री किसान निधि जैसी उन सभी सरकारी सुविधाओं को खारिज करने की व्यूह रचना का हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त खरीद नियमों के अड़ंगे डाल कर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली को खत्म करके कृषि व्यापार का क्षेत्र निजी व्यापारियों और कारपोरेट को सौंपने के एजेंडा की ओर बढ़ रही है।
इस स्थिति में किसानों को फसल बेचने में आ रही समस्याओं के दृष्टिगत हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने आपात बैठक करके 11 अप्रैल को चार घंटे तक प्रदेश भर में रास्ते रोकने की सांकेतिक कारवाई का आह्वान किया। उस दिन पुलिस की तमाम बौखलाहट के बावजूद शांतिपूर्ण ढंग से बीसियों स्थानों पर सफलता से रोड जाम किये गए और अनेक टोल प्लाजा भी बंद रखे गए। अगले ही दिन 12 अप्रैल को कृषि मंत्री शाम सिंह राणा के नरवाना मंडी में दौरे के समय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बलबीर की अगुवाई में किसानों ने उनके सामने रोष प्रकट किया और आमने-सामने जवाब तलबी की। मंत्री महोदय नए खरीद नियमों का कोई भी संतोषजनक औचित्य नहीं बता पाए और टाल-मटोल करते हुए वहां से खिसक गए।
हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा की 31 मार्च की जींद महापंचायत का आयोजन बहुत ही उपयुक्त समय पर हुआ जिससे प्रदेश के किसानों के खिलाफ हरियाणा सरकार ने जो प्रतिगामी कदम उठाए हैं उनके खिलाफ एकजुट संघर्ष करना संभव हो पाया जो अगले चरण में प्रवेश कर गया है। इस संबंध में 15 अप्रैल को रोहतक में किसान सभा राज्य कमेटी की बैठक में प्रदेश भर के किसानों को 11 अप्रैल की जुझारू कारवाई को सफल बनाने के लिए बधाई दी। उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना के 90 साल पूरे होने का ऐतिहासिक दिन भी था। उस दिन अनेक स्थानों पर सुबह सुबह किसान सभा के कार्यकर्ताओं ने लाल झंडे फहराकर संगठन को नई बुलंदियों तक ले जाने का संकल्प लिया।