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हिसार हत्या प्रकरण में सरकार झुकी – किसान नेता रिहा
स्वतंत्रता दिवस पर हरियाणा की भाजपा सरकार की पुलिस ने ऐतिहासिक शहर हांसी में हिसार के एक युवक की दिनदहाड़े हत्या करने वाले को गिरफ्तार करने की स्वाभाविक मांग करने वाले लोगों को बेरहमी से पीटा। दस किसान नेताओं को गंभीर धाराओं में गिरफ्तार कर लिया गया। इन किसान नेताओं को चिंन्हित करके पकड़ा गया और हत्या करने के प्रयास और देशद्रोह जैसी गंभीर धाराओं में जेल में डाला। इनमें से 5 अखिल भारतीय किसान सभा के थे। इनमें राज्य महासचिव साथी सुमित और राज्य उपाध्यक्ष शमशेर नंबरदार प्रमुख थे। उनके अलावा सुरेंन्द्र मान, सतपाल शर्मा और सुभाष भी । अन्य संगठनों से जुड़े सुरेश कोथ, सुबेदार रणबीर मलिक, जगमिंदर कुंडू, सुभाष ढिल्लों और शुलेंन्द्र कुंडू भी गिरफ्तार नेताओं में थे।
15 अगस्त के दमन के अगले ही दिन किसान सभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कृष्ण प्रसाद, उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बलबीर व दिनेश सिवाच आल इंडिया लायर्स यूनियन के वकीलों विक्रम मित्तल और सोमदत्त गौतम के साथ कोर्ट में पेश किए गए गिरफ्तार नेताओं से मिले और उसके बाद हिसार में चल रही पंचायत को उन्होंने संबोधित किया। समय पर एकजुट होकर प्रतिरोध की कार्रवाई को न्यायोचित बताते हुए उन्होंने कहा कि 24 घंटे के भीतर यदि न्याय नहीं मिला तो बड़ी कारवाई होगी जिसकी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की ही होगी।
इस प्रकरण में यह बखूबी प्रमाणित हुआ है कि जनता जब अपनी असली ताकत दिखाने पर उतर आती है तो सरकार का गुरूर कैसे चूर चूर हो सकता है। रातों -रात हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आन्दोलन की कमेटी को चंडीगढ़ बुलाकर न्याय की मांग के झुकना पड़ा। झूठी गंभीर धाराओं में जेल भेजने के मात्र 24 घंटे में धाराएं हटाकर सभी 10 नेताओं को रिहा करना पड़ा। वह जनता की उस दृढ़ एकता का ठोस उदाहरण है जो अपने निर्दोष युवा बेटे को खो चुके पीड़ित परिवार के साथ डंटकर खडी़ हो गई थी। पंचायत में यह शर्त रखी गई कि सभी 10 किसान नेताओं की रिहाई के बगैर जीवन कुंडू का दाह-संस्कार नहीं करेंगे।
इस प्रकरण की पृष्ठभूमि यह है कि हिसार जिला के गांव किनाला से हिसार शहर के सूर्य नगर में छोटी सी डेयरी करके गुजर बसर कर रहे एक मामूली किसान बीजेंद्र कुंडू के जवान बेटे जीवन सिंह पर 4 अगस्त को अल सुबह जान लेवा हमला किया गया। रमेश नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने 8-10 अन्य हमलावरों को साथ लेकर लाठियों से उस समय हमला किया जब वह अपनी रेहड़ी में पशुओं का गोबर इकठ्ठा करके डालने जा रहा था। जीवन कुंडू को अग्रोहा के मेडिकल कॉलेज में ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया।
सूर्य नगर का ही रमेश शर्मा अपनी दबंगई की वजह से कुख्यात है और फाइंनेंसर का गैरकानूनी धंधा चलाता है जो अपने आपमें एक ऐसा गोरखधंधा बन चुका है जिसने महंगाई और आर्थिक संकट की मार झेल रहे परिवारों को स्थाई रूप से अपनी जकड़ में फंसा लिया है जिसके कमर तोड़ ब्याज से मुक्त होना लगभग असंभव है।
डेयरी के गोबर और पशु चारे से “गंदगी” फैलने से क्रोधित रमेश पहले भी जीवन कुंडू को धमकी दे चुका था। परंतु 4 अगस्त के इस हमले में रमेश और उसके गिरोह के हाथों जीवन की मृत्यु की खबर सूर्य नगर में आग की तरह फैल गई और बडी़ संख्या में आक्रोशित महिला पुरुष सड़कों पर उतर आए। सब हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जि़ला प्रशासन पर नागरिकों ने धरना देकर पीड़ित परिवार द्वारा न्याय प्राप्ती का समर्थन कर दिया और परिवार ने न्याय मिलने तक मृतक की लाश हस्पताल से लेने और अंतिम संस्कार करने को मना कर दिया।
प्रदेश में संगठित अपराध से क्रोधित आम लोग इसमें सम्मिलित हो गए और विपक्षी दलों, जन-संगठनों, खापों, संयुक्त किसान मोर्चा और पीड़ित परिवार के ग्रामीणों की लामबंदी बढ़ती गई परंतु सभी मोर्चों पर विफल भाजपा सरकार और प्रशासन ने इसे गंभीरता नहीं लिया। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले कुरुक्षेत्र के सीविल हस्पताल में दाखिल एक दलित लड़की का स्वयं वरिष्ठ डाक्टर ने बलात्कार किया था। आरोपी डॉक्टर अपने प्रभाव की बदौलत सेवानिवृत्त होने के बावजूद पुनः नियुक्ति पर था। जनवादी महिला समिति और अन्य संगठनों ने इस जघन्य कृत्य के खिलाफ सशक्त आवाज उठाई । न केवल डाक्टर को गिरफ्तार किया गया परन्तु राज्य महिला आयोग की तत्कालीन विवादास्पद अध्यक्षा ने आरोपी डॉक्टर की बजाय जिस तरह स्टाफ नर्सों पर इस कांड के लिए हमला बोला उस दुस्साहस के लिए उन्हें स्वयं भी बे-आबरू होकर पद त्यागना पड़ा था।
10 दिन तक धरने बावजूद जीवन कुंडू हत्याकांड में मुख्य आरोपी रमेश शर्मा के गिरफ्तार न किये जाने के पीछे पता ये चला कि सत्ताधारी भाजपा के उचाना विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक देवेन्द्र अत्री से उसकी पारिवारिक निकटता है। इस बीच आंदोलन के नेतृत्व की ओर से यह घोषणा कर दी गई कि 15 अगस्त के दिन लोग हिसार के साथ लगते हांसी जिला केंद्र पर रोष मुज़ाहरा करेंगे जहां मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को झंडा फहराने आना था। आंदोलन की कमेटी को बुला कर न्याय का भरोसा दिलाने का लोकतांत्रिक रास्ता अपनाने की बजाय निरंकुश सरकार ने पुलिस दमन से उन पीड़ित परिवार व रोष प्रकट कर रहे महिला- पुरुषों की आवाज दबाने का रास्ता अपनाया जो 11 दिन से मृतक युवा जीवन कुंडू का दाह-संस्कार नहीं कर पा रहे थे।
15 अगस्त की सुबह किसान सभा व सीटू हिसार के अनेक पदाधिकारियों के घर पर पुलिस आ गई और दोपहर तक उनको घरों से नहीं निकलने दिया। इनमें सरबबत पूनिया, कपूर सिंह बगला , श्रद्धा नंद राजली, सुरेश सीटू ,हरीकेश पूनिया, संदीप कुमार कनोह, मेवा सिंह फौजी, प्रदीप बूरा, दरवेश कुंडू, नरेश भयान आदि थे। इनमें ऐसे भी हैं जिन्हें बाडो पट्टी टोल प्लाजा पर विरोध करते हुए पकड़ा और उन्हें रात को जमानत पर छोडा़ गया।
उस दिन हांसी शहर की ऐसी नाकेबंदी कर दी गई कि कोई भी प्रदर्शनकारी शहर में ही दाखिल न हो पाए। अपने वाहनों में आने वाले निहत्थे लोगों पर बिना उकसावे के लाठियां बरसाई गई और बुजुर्गों को भी नहीं बख्सा गया। स्वयं पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार को विडियो में देश-भर में न केवल पत्थर फेंकते देखा बल्कि उसने खुद पत्रकार सम्मेलन में पत्थर मारने को जायज ठहराते हुए कहा कि “ऐसा करना भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जरूरी है”। जंतर-मंतर की पेलट गन के प्रयोग और बिहार के ए-के 47 के प्रयोग के बाद भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस के लिए स्वीकृत मानदंडों की फ़ेहरिस्त में अब पत्थर मारने की कार्रवाई को हांसी के पुलिस कप्तान ने औपचारिक रूप से औचित्य प्रदान कर दिया है। यही नहीं विडियो साफ तौर पर पुष्टि करते हैं कि एक पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में दूसरे पुलिस अधिकारी से ए-के 47 छीन कर भाग रहा और लोगों की ओर तान रहा है। कामरेड सुमित ने रिहा होने के बाद मिडिया को बताया कि गिरफ्तार करते समय किसान नेताओं को पाकिस्तानी बोला, अश्लील गालियां दी और धक्के मारे। उकलाना विधानसभा क्षेत्र में मृतक का गांव पड़ता है और यहां के विधायक नरेश शेलवाल को भी पुलिस ने पसलियों पर चोटें मारी जो स्वयं अपने क्षेत्र के लोगों के साथ प्रदर्शन में मौजूद थे। इससे यह स्पष्ट है कि जंतर-मंतर की तर्ज पर पुलिस को राजनीतिक आकाओं द्वारा विशेष रूप से निर्देशित किया गया था कि उन्हें क्या करना है।
कामरेड इंद्रजीत सिंह ने 16 अगस्त की हिसार पंचायत में स्वतंत्रता दिवस के दिन हुए पुलिस दमन की कड़ी निंदा की । उन्होंने पूछा कि ये कौनसी तहजी़ब है कि जिसके बेटे की लाश का 12 दिन तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ हो उस अभागे बाप की भी गिरफ्तारी करने से पुलिस ने गुरेज नहीं किया। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह सब निष्पक्ष जांच का विषय बनता है।
बहरहाल 16 अगस्त को हरियाणा सरकार ने मुकदमें उठाने के अलावा यह मानना पड़ा कि मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी, परिवार को आर्थिक सहायता और मुख्य आरोपी को जल्द पकड़ेंगे। अपने आपमें इससे सरकार की जवाबदेही की पुष्टि भी होती है।
बहरहाल 18 अगस्त को किनाला गांव में भारी जनसमूह के साथ और पीड़ित परिवार और रिहा होकर आए 10 किसान नेताओं द्वारा श्रद्धांजलि देने के साथ जीवन कुंडू का दाह-संस्कार हुआ।
उधर पत्थरबाज पुलिस अधीक्षक और सी. आई. ए. स्टाफ के इंस्पेक्टर व किसान नेताओं से बदसलूकी करने वाले अन्य पुलिस कर्मियों के आपराधिक आचरण के लिए कारवाई और मुख्य आरोपी को पकड़े जाने के सवाल अभी लंबित हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार के खिलाफ सभी समुदायों में भारी रोष है और उसे संगठित करते हुए जनतांत्रिक दिशा में नीति परिवर्तन की ओर ले जाना जरूरी है। यह नहीं भूलना चाहिए कि “पहचान की राजनीति” में माहिर भाजपा इसी जनाक्रोश को सांप्रदायिक और जातिवादी आधार पर बांटकर उसे प्रतिक्रियावादी दिशा देने में कामयाब हो जाएगी।