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अखिल भारतीय किसान सभा के 36वाँ सम्मेलन की स्वागत समिति की पहली बैठक

अखिल भारतीय किसान सभा के 36वाँ सम्मेलन की स्वागत समिति की पहली बैठक

अखिल भारतीय किसान सभा का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन 15 से 18 नवंबर को तेलंगाना के नलगोंडा शहर में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य तेलंगाना के सशस्त्र किसान संघर्ष की गौरवशाली विरासत और उसकी संघर्षशील भावना को देशभर के किसान आंदोलनों तक पहुँचाना का प्रयास है।

36वें किसान सभा सम्मेलन की स्वागत समिति की पहली बैठक 17 जुलाई को नलगोंडा जिला मुख्यालय स्थितयेचुरी गार्डन्स में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य अध्यक्ष पोथिनेनी सुदर्शन ने की।

बैठक को संबोधित करते हुए किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिवविजू कृष्णन ने कहा कि 11 अप्रैल 1936 को लखनऊ में स्थापित अखिल भारतीय किसान सभा पिछले 90 वर्षों से देश के किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने बताया कि इससे पहले तेलुगु राज्यों में किसान सभा के चार राष्ट्रीय सम्मेलन—पालासा (1940), विजयवाड़ा (1944), खम्मम(1989) तथा गुंटूर (2010)—आयोजित हो चुके हैं और इनमें से प्रत्येक सम्मेलन किसान आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

उन्होंने बताया कि पालासा और विजयवाड़ा सम्मेलनों ने ब्रिटिश शासन के दौरान जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ किसान संघर्षों को दिशा दी। खम्मम सम्मेलन में आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के प्रभाव पर देशव्यापी चर्चा की शुरुआत हुई थी। वहीं गुंटूर सम्मेलन में किसानों की आत्महत्याओं के खिलाफ कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसका नारा था—आत्महत्या नहीं… एकजुट संघर्ष करेंगे।”

उन्होंने कहा कि तेलंगाना के सशस्त्र किसान संघर्ष की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस वर्ष का सम्मेलन उस ऐतिहासिक संघर्ष के केंद्र नलगोंडा में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

विजू कृष्णन ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की पिछले 12 वर्षों की नीतियों के कारण कृषि क्षेत्र और किसान समुदाय गहरे संकट में हैं। उन्होंने किसानों, खेत मजदूरों, बटाईदार किसानों, महिला किसानों और प्रवासी मजदूरों के बीच बढ़ती आत्महत्याओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ किए जा रहे व्यापार समझौतों, जिनके तहत कपास, मक्का, सोयाबीन, अनाज और डेयरी उत्पादों के शुल्क-मुक्त आयात का रास्ता खुल रहा है, से भारतीय किसानों को भारी नुकसान होगा।

उन्होंने याद दिलाया कि 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन ने केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने के लिए मजबूर किया था। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान लागू किए गए इन कानूनों के खिलाफ चले इस संघर्ष में 736 किसानों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब उन्हीं कृषि कानूनों को अप्रत्यक्ष रूप से लागू करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनाज भंडारण केंद्रों को कॉरपोरेट संस्थाओं को सौंपना कृषि क्षेत्र में एकाधिकार स्थापित करने का रास्ता खोल रहा है। उन्होंने किसानों, खेत मजदूरों और मजदूर वर्ग की एकजुट लड़ाई का आह्वान किया।

तेलंगाना राज्य महासचिव तीगला सागर ने किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलनों की तैयारी का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि संगठन फलों, सब्जियों, कपास और मिर्च सहित विभिन्न कृषि उत्पादों के लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है।

संगठन द्वारा बढ़ी हुई उर्वरक कीमतों को कम करने, कृषि सब्सिडी में वृद्धि, किसानों का कर्ज की माफ करने तथा किसान विरोधी नीतियों को पलटने की मांग को लेकर लगातार धरने, प्रदर्शन और आंदोलन किए जा रहे हैं।

नलगोंडा में आयोजित होने वाला किसान सभा का 36वाँ अखिल भारतीय सम्मेलन किसानों के सामने मौजूद प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक और संघर्षशील आंदोलन की कार्ययोजना तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

तेलंगाना रायथु संघम (सम्बंधित किसान सभा) ने किसानों तथा किसान समुदाय के शुभचिंतकों से सम्मेलन को सफल बनाने के लिए आर्थिक एवं नैतिक सहित हर तरह का सहयोग देने की अपील की है।

स्वागत समिति के लिए निम्नलिखित पदाधिकारियों की चुना गया है

मानद अध्यक्ष: प्रोफेसर अलदास जनय्या, कुलपति, प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय

अध्यक्ष: जुलकांति रंगारेड्डी, पूर्व विधायक एवं सीकेसी सदस्य

सलाहकार: बी.वी. राघवुलु, डीएसएमएम

मुख्य संरक्षक: प्रो. दांडा राजी रेड्डी, कुलपति, हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, पोथिनेनी सुदर्शन, तीगला सागर

महासचिव: मुदिरेड्डी सुधाकर रेड्डी, किसान सभा जिला अध्यक्ष

कोषाध्यक्ष: वी. वेंकटेश्वरलु

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