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सम्पादकीय: नहीं चला नारी वंदन का घड़ियाली क्रंदन
बकौल अल्बर्ट आइंस्टीन असीमित समझे जाने वाले ब्रह्मान्ड की भी सीमा नापी जा सकती है, मगर मूर्खता की कोई सीमा नहीं होती। और कहीं उसमें धूर्तता का भी तड़का लग जाये तो फिर ठगों की चांदी कटना तय माना जाता है। मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ। जाल के पूरी तरह बिछने के पहले ही तोते उड़ गए और खुद को उस्ताद समझने वाले बहेलिये को झाल मूड़ी की दुकान पर खड़ा खीज मिटाता छोड़ गये।
इरादा लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का मनमाना अधिकार हथियाने का था ताकि भारत के राज्यों के संघीय गाणराज्य का रूप बदल कर उसे मोदी शाह और इस तरह संघी नजरिये की सल्तनत में बदला जा सके। विपक्ष ने इस धूर्त इरादे को पहचाना और पहली बार पूरी तरह एकजुट होकर उसे बाक़ाम कर दिया। अपनी कुटिलता पर पर्दा डालने के लिए कुनबे ने इसे महिला आरक्षण को रोका जाना बताकर नारी वंदन के घड़ियाली क्रंदन में सारी ताकत झोंके दी । इसकी तैयारी पहले ही की जा चुकी थी । लोकसभा सदस्य सदन से बाहर निकलते उससे पहले ही हाथों में छपे हुए पोस्टर्स और फैस्टून्स लेकर भाजपा की महिलायें संसद परिसर में ही प्रदर्शन करने खड़ी हो गयीं । चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाते हुए प्रधानमंत्री ने सरकारी माध्यमों से राष्ट्र के नाम सन्देश के नाम पर झूठ का गरल बहा दिया ।
सबसे चौंकाने वाली भूमिका उस मीडिया की रही जिससे सच पहुंचाने की अपेक्षा की जाती है : छपाऊ और दिखाऊ दोनों तरह के मीडिया ने मोदी शाह के सुर में सुर मिलाते हुए पूरी बेशर्मी के साथ यह जानते हुए भी कि इसका 2023 में सर्वसम्मति से मंजूर महिला आरक्षण क़ानून से कोई संबंध नहीं है, विपक्ष द्वारा उसे ख़त्म किये जाने का कोहराम मचाना शुरू कर दिया ।
नारी वंदन के नाम पर घड़ियाली क्रंदन वह भाजपा कर रही है जो विचार और व्यवहार में महिला विरोध से पगी हुई है । जो घोषित रूप में मनुस्मृति को मानती है। जिसके नवग्रहों में इस देश के जघन्य उत्पीड़क पाए जाते हैं । चिन्मयानन्द इनकी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुका है ।ब्रजभूषण शरण, कुलदीप सेंगर इनके प्रिय नायकों में से एक है । बलात्कार के 2000 से अधिक विडियो वाले प्रज्वल रेवन्ना को जिताने के लिए मोदी सभाएं करते हैं । गोवा में 30 से अधिक नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार कर उनके विडियो बनाने वाला सोहम नायक भाजपाई है । महाराष्ट्र के बलात्कारी अशोक खरात की जितनी भी तस्वीरें मिलती हैं वे भाजपा के नेताओं, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ हैं । अंकिता भंडारी को इन्साफ दिलाने के लिए पूरा उत्तराखंड सडकों पर है और उसके साथ बलात्कार करके ह्त्या के आरोपी को बचाने के लिए पूरी भाजपा उसकी ढाल कवच और तलवार बनी हुई है । आसाराम से गुरमीत राम रहीम तक को यह अपना ब्रांड एम्बेसेडर बनाये हुए है । ऐसे सैकड़ों उदाहरण और दिए जा सकते हैं – अटल बिहारी वाजपेयी के दिए कुख्यात मुहावरे में कहें तो भले हर भाजपाई बलात्कारी न हो, मगर ज्यादातर बलात्कारी भाजपाई कुनबे के जरूर निकलते हैं । भारतीय जनता पार्टी के सबसे अधिक मौजूदा सांसद और विधायक महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और यौन उत्पीड़न जैसे अपराध के मामलों का सामना कर रहे हैं। इनकी संख्या 54 है । इनमे, भाजपा के 5 सांसद, विधायक ऐसे हैं जिन पर सीधे तौर पर बलात्कार की धारा 376 के आरोप हैं।
महिला विरोध और नारी बहिष्करण कुनबे का वैचारिक आधार है । भारत की महिलाओं को सदियों पुरानी बेड़ियों से मुक्त कराने के कानून बनाने की शुरुआत आजादी के बाद क़ानून मंत्री के रूप में डॉ अम्बेडकर द्वारा रखे गये हिदू कोड बिल के मसौदे के साथ हुई थी । भाजपा का मात पिता संगठन और हिन्दू महासभा देश के वे अकेले संगठन थे जिन्होंने इस हिन्दू कोड बिल के खिलाफ आन्दोलन किये । इसी स्त्री विरोधी सोच का नतीजा है कि पूरे 12 सालों के राज में मोदी सरकार कथित सम्मान हत्याओं – ऑनर किलिंग – के खिलाफ कोई कानून नहीं लाई । इस बार जनता झाँसे में नहीं आई और भक्तों के ब्रह्मा झाल मूड़ी के खोमचे पर खड़े नजर आये । उम्मीद है जल्द ही जनता उन्हें और तिक्खट झाल की झरप का स्वाद चखाएगी ।