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ओडिशा कृषक सभा – 25वां राज्य सम्मेलन
ओडिशा कृषक सभा का 25वां राज्य सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर 2025 तक रणपुर में संपन्न हुआ । स्वागत भाषण स्वागत समिति के सचिव हरिश चंद्र मिश्रा ने दिया। सम्मेलन का उद्घाटन किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हन्नान मौल्ला ने किया। समापन भाषण किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव वीजू कृष्णन ने दिया।
सांगठनिक रिपोर्ट ओडिशा कृषक सभा के राज्य महासचिव सुरेश चंद्र पाणिग्राही द्वारा प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट पर चर्चा में कुल 29 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 51 सदस्यीय राज्य समिति और 17 राज्य पदाधिकारी मंडल का चुनाव किया गया। शितांशु सेनापति को राज्य अध्यक्ष, यामेश्वर सामंतराय को राज्य महासचिव और अभिराम बेहरा को राज्य कोषाध्यक्ष चुना गया।
सम्मेलन को कई बिरादराना संगठनों ने शुभकामनाएं दीं। इनमें—सीटू के राज्य सचिव पुष्पा दास,
खेत मजदूर यूनियन केराज्य उपाध्यक्ष नित्यानंद परिडा, जनवादी नौजवान सभा के राज्य संयोजक सरोज नायक,जनवादी महिला समिति राज्य समिति सदस्य ज्योतिप्रभा जेना, एसएफआई के राज्य सचिव चंदन साहूऔर आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के राज्य सचिव साल मार्डी शामिल थे ।

किसान आंदोलन को मजबूत करने हेतु सम्मेलन में अनेक प्रस्ताव पास किये गए जिनमे स्वामीनाथन आयोग की सी2+50% सिफारिश के अनुसार सभी कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने, बटाईदारों/ पट्टाधारीयों को किसान के रूप में मान्यता देकर उन्हें भूमि स्वामी किसानों के समान सभी लाभ दिए जाएं—जिसमें मंडियों में फसल बेचने का अधिकार, बैंक व सहकारी ऋण, फसल बीमा, उर्वरक व कीटनाशक सब्सिडी, तथा प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान का मुआवजा शामिल है। इसके लिए बटाईदार संरक्षण अधिनियम बनाया जाए, जनविरोधी विद्युत (संशोधन) विधेयक को वापस लेने और स्मार्ट मीटरों का लगाना बंद करने, वास्तविक किसानो को भूमि स्वामित्व अधिकार देने और सम्पूर्ण कृषि भूमि को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाने, आदिवासियों और पारंपरिक वनवासियों को वन भूमि अधिकार देने तथा लघु वनोपज के लिए एमएसपी लागू किये जाने, 60 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक किसान (सीमांत, छोटे, गरीब और मध्यम) तथा कृषि मजदूरों को 6,000 रुपये मासिक पेंशन देना शुरू करने, प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले सभी नुकसानों के लिए पर्याप्त मुआवजा सुनिश्चित करने हेतु एक व्यापक फसल बीमा योजना लागू करने, सीमांत, छोटे, गरीब और मध्यम किसानों तथा खेत मजदूरों के सभी ऋण माफ किए जाने, मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी 600 रुपये करते हुए 200 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करने की मांगें शामिल हैं ।