Magazine

छत्तीसगढ़: करीब सवा चार साल के आंदोलन की शानदार जीत

छत्तीसगढ़: करीब सवा चार साल के आंदोलन की शानदार जीत

कुसमुंडा (कोरबा)। जमीन के बदले रोजगार की मांग कर रहे भूविस्थापित किसानों के आंदोलन की जीत हुई है। एसईसीएल के बिलासपुर मुख्यालय ने पुराने लंबित रोजगार प्रकरण मामले में एक भू विस्थापित को रोजगार देने के लिए एप्रुवल आदेश बिलासपुर मुख्यालय से जारी किया जिसके बाद प्रक्रिया को पूरा कर कुसमुंडा महाप्रबंधक सचिन तानाजी पाटिल के हाथों भू विस्थापित को नियुक्ति पत्र दिया गया।

कुसमुंडा महाप्रबंधक सचिन तानाजी पाटिल ने नियुक्ति पत्र देते हुए रघुनंदन यादव को एसईसीएल परिवार में शामिल होने के लिए शुभकामनाएं देते हुए भू विस्थापितों को आश्वाशन भी दिया की जिनकी जमीन अधिग्रहण की गई है उन्हे नियमानुसार रोजगार दिलाने में तेजी लाई जायेगी नियुक्ति पत्र देते समय कुसमुंडा एपीएम और भू राजस्व समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

जीत से उत्साहित आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष को और तेज करने का फैसला किया है और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित सभी विस्थापित परिवारों को रोजगार मिलने तक आंदोलन जारी रखने का निश्चय किया है। किसान सभा ने इसे भू विस्थापित किसानों के संघर्षों की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में भी सभी भू विस्थापित खातेदारों के रोजगार के लिए संघर्ष तेज करते हुए आगे भी लड़ेंगे और जितेंगे।

उल्लेखनीय है कि कुसमुंडा कोयला खदान विस्तार के लिए 1978 से 2004 तक जरहा जेल, बरपाली, दुरपा, खम्हरिया, मनगांव, बरमपुर, दुल्लापुर, जटराज, सोनपुरी, बरकुटा, गेवरा, भैसमा आदि गांवों में बड़े पैमाने पर हजारों किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। उस समय एसईसीएल की नीति भूमि के बदले रोजगार देने की थी। लेकिन प्रभावित परिवारों को उसने रोजगार नहीं दिया। बाद में यह नीति बदलकर न्यूनतम दो एकड़ भूमि के अधिग्रहण पर एक रोजगार देने की बना दी गई। इससे अधिग्रहण से प्रभावित अधिकांश किसान रोजगार मिलने के हक़ से वंचित हो गए।

पिछले 1517 दिनों से छत्तीसगढ़ किसान सभा के सहयोग से भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के बैनर पर भूविस्थापितों द्वारा ‘जमीन के बदले रोजगार’ के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है। आंदोलनकारी जमीन अधिग्रहण के समय की पूर्व नीति के अनुसार सभी प्रभावितों को रोजगार देने की माग कर रहे हैं 1517 दिनों से चल रहे अनिश्चित कालीन आंदोलन को बड़ी जीत मिली है। 1988 में बरपाली गांव के रघुनंदन यादव की जमीन का अधिग्रहण किया गया था, अधिग्रहण के 37 साल बाद भी रोजगार के लिए भटक रहे थे 1517 दिनों के संघर्ष के बाद रोजगार देने के लिए एसईसीएल को आदेश जारी करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। यह खबर मिलते ही धरनास्थल पर इस जीत की खुशी में मिठाईयां बांटी गई।

इस अवसर पर आयोजित सभा को छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने संबोधित करते हुए कहा कि किसान सभा का शुरू से मानना है कि जिनकी जमीन का एसईसीएल ने अधिग्रहण किया है, प्रत्येक खातेदार को स्थाई रोजगार मिलना चाहिए, क्योंकि किसानों के पास जीविका का एकमात्र साधन जमीन ही होता है। यह भू विस्थापितों के संघर्षों की जीत है कि एसईसीएल को इस जायज मांग को मानना पड़ा है। अपने अधिकार के लिए लड़े है उन्हीं की जीत हुई हैं भू विस्थापितों को आगे भी सभी मांगो में जीत मिलेगी।

भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के रेशम यादव और दामोदर श्याम ने कहा की एसईसीएल कुसमुंडा में पुराने लंबित प्रकरणों में रोजगार के आदेश के बाद भू विस्थापित किसानों द्वारा चल रहे आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है और अन्य सभी भू विस्थापितों में उम्मीद की किरण दिखाई दिख रही है एकता बद्ध तरीके से आंदोलन करने में ही सभी भू विस्थापितों को रोजगार मिलेगा ।

रघुनंदन यादव ने कहा किएसईसीएल में 1988 में उनकी जमीन अधिग्रहण हुई थी अधिग्रहण के बाद दफ्तरों का रोजगार के लिए चक्कर लगाया लेकिन रोजगार नहीं मिला भटक कर थक गए थे और रोजगार की उम्मीद समाप्त हो गई थी लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ किसान सभा के सही मार्ग दर्शन नेतृत्व में 1517 दिनों से एकता बद्ध तरीके से भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने संघर्ष किया संघर्ष के बाद एसईसीएल ने रोजगार के लिए पात्र मानते हुए रोजगार के लिए नियुक्ति पत्र जारी किया है यह संघर्ष की जीत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *