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मध्य प्रदेश : मूंग किसानों ने राजधानी में डाला डेरा, घेरा मुख्यमंत्री निवास
मध्यप्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों ने राजधानी भोपाल में डेरा डालकर मुख्यमंत्री निवास को घेर लिया और तब तक घेरे रहे जब तक कि उनकी मांगें काफी हद तक मान नहीं ली गयीं । हालांकि बाद में मोहन यादव के मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार अपनी ही घोषणाओं से मुकर रही है ।
इस स्वतःस्फूर्त आन्दोलन की मुख्य वजह एमएसपी निर्धारण से उपजा असंतोष था जो खरीद की प्रक्रिया शुरू न किये जाने से और अधिक विस्फोटक हो गया । वर्ष 2026 27 के लिए खरीफ सीजन में मूंग का एम एस पी 8780 रुपए प्रति क्विंटल है जिसमें सरकार ने पिछले वर्ष के समर्थन मूल्य से मात्र 12रु प्रति क्विन्टल की बढ़ोतरी की है । इसी के साथ सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी के लिए इस वर्ष 25% यानी एक क्विंटल 20 किलो खरीदे जाने की सीमा तय कर दी गयी जबकि पिछले सीजन 6 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से खरीदी की गई थी।
किसान सरकार द्वारा कम मात्रा में मूंग खरीदे जाने से आक्रोशित थे ही इसी बीच टोकन प्रणाली से खाद दिए जाने से जटिलता और बढ़ गयी । समय पर खाद न मिलने के कारण संकट और गंभीर हो गया । किसानों एवं किसान संगठनो ने शासन प्रशासन से कई जगह ज्ञापनों के माध्यम से मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई । नरसिंहपुर नर्मदा पुरम रायसेन एवं हरदा जिले के किसानो ने 27 जुलाई से होशंगाबाद के नर्मदा घाट पर एकत्रित होकर किसान अधिकार पदयात्रा शुरू करने का एलान किया जिसे तीन दिन में मुख्यमंत्री निवास पहुंचना था । इस बीच सरकार की ओर से किसान प्रतिनिधियों को 27 जुलाई को मुख्यमंत्री से मिलने का न्योता मिला, लेकिन मुख्यमंत्री उस दिन नहीं मिले उल्टा यात्रा में शामिल होने वाले आंदोलनकारी किसानों एवं किसान नेताओं को नर्मदा पुरम में पुलिस द्वारा रोका गया। मुख्यमंत्री के न मिलने और शांतिपूर्ण आंदोलन को असफल करने की साजिश को देखते हुए तय समय पर किसान पदयात्रा शुरू होने वाले स्थल पर पहुंच गए और यात्रा शुरू कर दी । 2 किलोमीटर के अंदर ही नर्मदा नदी के पुल पर पुलिस द्वारा बेरीकेड लगाए गए जिसे किसान तोड़ते हुए आगे निकल गए। पुलिस द्वारा बीच-बीच में बेरीकेड लगाकर रोकने का प्रयास किया, । तीसरे दिन 29 जुलाई को भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के सामने भारी पुलिस बल और बेरीकेड लगाए थे उन्हें भी तोड़कर किसान आगे बढ़े और रोशनपुरा चौराहे पर जाम लगाकर शाम को डेरा डाल दिया। सरकार की ओर से 25% से बढ़ाकर 60% मूंग खरीदी करने स्लॉट बुकिंग की तारीख और खरीदी आगे बढ़ाए जाने और खाद विक्रय में टोकन प्रणाली समाप्त कर सुलभता से खाद उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव आया। किसानो ने बैठक कर इस प्रस्ताव से सहमत होकर आंदोलन को स्थगित कर कर दिया गया।
खरीदी मात्रा बढ़ने से खरीदी केंद्रों पर भारी भीड़ और अव्यवस्था के चलते स्लॉट की तय समय पर तुलाई होना असंभव हो गया, अंतिम तारीख निकलते देख जगह-जगह किसानों को ट्रैक्टर ट्राली के साथ चक्का जाम करना पड़ा, प्रशासन को मजबूर होकर केंद्रों की संख्या बढ़ानी पड़ी, इसके बावजूद भी अंतिम दिनांक तक कई किसानों की 15 से 20 दिनों तक लाइन में लगे रहने के बाद मूंग नहीं तुल सकी । 10 अगस्त के बाद तारीख बढ़ाए जाने का पोर्टल राज्य से बंद कर दिया गया, जिले के अधिकारी मजबूर हो गए।
समस्या का हल ना होते देखा मध्य प्रदेश किसान सभा के राज्य पदाधिकारी 19 अगस्त को वल्लभ भवन जाकर कृषि मंत्रालय में कृषि सचिव से मिले और शेष रहे किसानों के लिए अंतिम तारीख बढ़ाकर मूंग खरीदी जाने के संबंध में अतिशीघ्र समस्या का समाधान करने ज्ञापन सौंपा गया । उसी दिन 19अगस्त को राज्य से पोर्टल खोला गया सभी वंचित किसानों की अंतिम तारीख बढ़ाकर सभी की मूंग खरीदी गई। ज्ञापन सौंपते समय मध्य प्रदेश किसान सभा के महासचिव अखिलेश यादव, सहायक महासचिव जगदीश पटेल, राज्य उपाध्यक्ष मुरारी लाल धाकड़ एवं कार्यालय सचिव उपेंद्र यादव मौजूद थे।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के 34 जिलों में मूंग खरीदी की जाती है ।