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अखिल भारतीय किसान सभा के 90 वर्ष: स्थापना दिवस पर वर्षभर के उत्सवों की शुरुआत

अखिल भारतीय किसान सभा के 90 वर्ष: स्थापना दिवस पर वर्षभर के उत्सवों की शुरुआत

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) की स्थापना के गौरवशाली 90 वर्ष पुरे होने के मौके पर वर्षभर चलने वाले कार्यकर्मों की शुरुआत 11 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में किसान सभा का झंडा फहराकर की गई। किसान सभा के अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले ने एआईकेएस के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित एक उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में झंडा फहराया, जिसमें विभिन्न वर्गीय और जन संगठनों तथा लोकतांत्रिक आंदोलन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। देशभर में किसान सभा की हजारों ग्राम इकाइयों ने भी एआईकेएस का झंडा फहराकर इस दिन को मनाया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में अशोक धवले ने इस सुखद संयोग को याद किया कि इस वर्ष 11 अप्रैल महान क्रांतिकारी सामाजिक सुधारक, जाति और लैंगिक उत्पीड़न के प्रखर विरोधी तथा किसानों के शुरुआती समर्थकों में से एक महात्मा ज्योतिराव फुले की द्विशताब्दी जयंती भी थी। उन्होंने एआईकेएस के 90 वर्षों के इतिहास के तीन चरणों—1936-47, 1947-90 और 1991-2026—की चर्चा करते हुए सभी किसान सभा इकाइयों से इस ऐतिहासिक संघर्ष यात्रा—जो साम्राज्यवाद, सामंतवाद और पूंजीवाद के खिलाफ रही है—के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यक्रम बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने वर्तमान भाजपा-आरएसएस नेतृत्व वाली मोदी सरकार के तहत जनता पर हो रहे कॉरपोरेट-सांप्रदायिक हमलों के खतरे के खिलाफ लड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया और देशभर में लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील ताकतों की व्यापकतम एकता बनाने का आह्वान किया। अंत में, उन्होंने आगामी एक दशक में संघर्षों, वैचारिक अभियानों और संगठनात्मक विस्तार को तेज करने का आह्वान किया, ताकि एआईकेएस का शताब्दी वर्ष ऐतिहासिक बन सके।

सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात ने कहा कि स्थापना के समय से ही एआईकेएस के नेतृत्व में चला उग्र किसान आंदोलन और सामंती-औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ उसके जनसंघर्षों ने भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के निर्माण और विस्तार में तथा साम्राज्यवाद-विरोधी संघर्ष को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सत्ता पर काबिज हुए शासक वर्ग—बड़े पूंजीपति वर्ग और अर्ध-सामंती जमींदारों की गठजोड़—ने किसानों के साथ विश्वासघात किया और क्रांतिकारी भूमि सुधारों को लागू करने में विफल रहे। उन्होंने कॉरपोरेट हमलों का मुकाबला करने और भाजपा-आरएसएस नेतृत्व वाली मोदी सरकार के तहत कृषि और घरेलू बाजार में साम्राज्यवादी हस्तक्षेप के खतरे का विरोध करने के लिए किसान एकता तथा मजदूर–किसान एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

एआईकेएस के महासचिव विजू कृष्णन ने किसान सभा के इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण संघर्षों को याद करते हुए “हर गांव में किसान सभा और हर किसान किसान सभा में” के नारे के साथ संगठन की स्वतंत्र ताकत को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। एआईकेएस देश का सबसे बड़ा और सबसे पुराना किसान संगठन है, जिसके 27 राज्यों, 434 जिलों और 75,799 ग्राम इकाइयों में 1.53 करोड़ सदस्य हैं। उन्होंने कृषि पर कॉरपोरेट कब्जे के खिलाफ उत्पादक सहकारिताओं पर आधारित वैकल्पिक नीतियों के नारे को आगे बढ़ाने और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ समन्वय में, किसानों और मजदूरों के अधिकारों पर हो रहे कॉरपोरेट हमलों के खिलाफ व्यापक संयुक्त संघर्ष छेड़ने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने अपने संक्षिप्त संबोधन में 1947 से पहले उत्तर पश्चिम भारत के क्षेत्रों में किसान आंदोलन पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि अविभाजित पंजाब में 1936 से पहले लाहौर, लायलपुर, सियालकोट, अमृतसर आदि में सूदखोरों द्वारा भूमि की  कुड़की, मंडियों की लूट जैसे सवालों पर किसानों के बहुत बड़े और लंबे आंदोलन हुए थे। पहले संगठन का नाम “पंजाब किसान कमेटी” था जो बाद में अखिल भारतीय किसान सभा के रूप में विधिवत गठन हो गया। लेकिन 1947 में देश के विभाजन के समय इन इलाकों में भीषण सांप्रदायिक दंगे हुए। हजारों निर्दोष लोगों के कत्ल  हुए और लाखों परिवारों का उजड़ कर विस्थापन हुआ । इसके परिणामस्वरूप जनवादी आंदोलन को ऐसा गहरा धक्का लगा जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो पाई है।

एआईकेएस के वित्त सचिव पी. कृष्णप्रसाद ने सभा का स्वागत किया और एआईकेएस केंद्रीय किसान कमेटी (सीकेसी) के सदस्य पुष्पेंद्र त्यागी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। स्वदेश देवरॉय (सीटू), बी. वेंकट (एआईएडब्ल्यूयू), पुण्यवती (एआईडीडब्ल्यूए), संजीव (डीवाईएफआई), सुभाष जाखड़ (एसएफआई), प्रो. अर्चना प्रसाद, और डी.एस. डागर (एआईएसकेएस) ने भी सभा को संबोधित किया।

बी.वी. राघवलु, आर. अरुण कुमार, विक्रम सिंह, मुरलीधरन, अनुराग सक्सेना, राजीव कुन्वर, आशा शर्मा, मैमूना मोल्लाह, शेहबा फारूकी, विमल पालीवाल, सहीराम सहित अनेक लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे। बंगला मंच और जन नाट्य मंच के कलाकारों ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किए। एआईकेएस और किसान आंदोलन के ऐतिहासिक संघर्षों पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। प्रगतिशील साहित्य की बिक्री की गई। एआईकेएस कार्यालय को उसके 91वें स्थापना दिवस के अवसर पर लाल झंडों से सुसज्जित किया गया।

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