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राज्यों में गतिविधियां

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ग्रेटर नोएडा: अखिल भारतीय किसान सभा का तीसरा जिला सम्मेलन

दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के ग्रेटर नोएडा में किसान सभा का तीसरा  जिला सम्मेलन 8 मार्च 2026 को महिला दिवस के दिन इटैहरा गांव में संपन्न हुआ। सम्मेलन में ग्रेटर नोएडा के भूमि  अधिग्रहण से प्रभावित विभिन्न गांवों से 250 किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जिनमें करीब 50 महिलायें थीं। जिला अध्यक्ष रूपेश  वर्मा द्वारा किसान सभा का झंडा फहराये जाने और प्रतिनिधियों द्वारा शहीदों को श्रंद्धाजलि अर्पित किये जाने के बाद किसान सभा के राष्ट्रीय वित सचिव पी कृष्णप्रसाद ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि देश  और उत्तरप्रदेश की भाजपा सरकारें किसान विरोधी नीतियां लागू कर रही है जिससे किसानों की जमीन छीनी जा रही है और कृषि संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने गांवों में किसान सभा को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

अध्यक्ष के सम्बोधन के बाद जिला महासचिव जगबीर नंबरदार ने संगठन व गतिविधियों पर रिर्पोट पेश  करते हुए कहा कि किसान सभा ने दिखाया है कि वही क्षेत्र के किसानों की लड़ाई ल़ड़ सकती है। रिर्पोट को पारित किये जाने के बाद नई जिला कमेटी का चुनाव किया गया जिसमें डा रूपेश वर्मा को अध्यक्ष संदीप भाटी को महासचिव व वीर सिंह नागर को पुनः संरक्षक चुना गया। अखिल भारतीय किसान सभा की केन्द्रीय कमेटी के सदस्य पुष्पेन्द्र त्यागी के संबोधन के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। उन्होंने क्षेत्र के किसानों के जुझारू आंदोलन के महत्व की चर्चा करते हुए बढ़ते गैर कानूनी पुलिस दखल और जनता के अधिकारों पर बढ़ते हमलों की चुनौती से निपटने के लिए समाज में जागरूपता बढ़ाने और एकता को मजबूत करने की अपील की।

छत्तीसगढ़ किसान सभा का राज्य स्तरीय शिविर

अखिल भारतीय किसान सभा की छत्तीसगढ़ राज्य समिति ने 22-23 फरवरी, 2026 को कल्याणपुर में शिविर का आयोजन किया। इस दो दिवसीय शिविर के पहले दिन रखे गये चार सत्रों में चार विषयों पर प्रस्तुति व चर्चा हुई। पहले व दूसरे सत्र में ‘किसान सभा का इतिहास और योगदान’ तथा मौजूदा हालात और किसान आंदोलन के काम विषयों पर पुष्पेन्द्र त्यागी ने प्रस्तुति दी। दूसरे सत्र में, ‘संगठनः सदस्यता, समितियों की कार्यप्रणाली’ तथा ‘संघर्षः स्वतंत्र व संयुक्त के बीच समन्वय छत्तीसगढ़ के विषेष परिप्रेक्ष्यमें’ विषयों को कामरेड अवधेश कुमार ने पेश किया। शिविर के दूसरे दिन कामरेड बादल सरोज ने ‘किसान आंदोलन की वैचारिक चुनौतियां व हमारे काम’ तथा ‘छत्तीसगढ़ की चैथाई सदी: एक आकलन’ विषयों पर अपनी बात रखी।

इस शिविर में साठ से अधिक आदिवासी महिला-पुरूष किसानों ने भाग लिया। शिविर का उद्देष्य छत्तीसगढ़ में किसान सभा के संगठन का विस्तार करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना था। शिविर के साथ ही किसान सभा की राज्य समिति के उपस्थित साथियों की बैठक का भी आयोजन किया गया।

त्रिपुरा में विधानसभा मार्च पर दमन: किसान-मज़दूर संगठनों का विरोध और 12-सूत्रीय मांगें

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस), अखिल भारतीय कृषि मज़दूर संघ (एआईएडब्ल्यूयू) और गणमुक्ति परिषद ने मिलकर बजट सत्र के दौरान त्रिपुरा विधानसभा तक एक मार्च निकाला। यह मार्च किसान-विरोधी, गरीब-विरोधी नीतियों और लोकतंत्र पर हो रहे हमलों के विरोध में था, और इसके ज़रिए 12-सूत्रीय मांगों का एक चार्टर पेश किया गया। पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद, किसानों और कृषि मज़दूरों ने विधानसभा तक मार्च किया। विधानसभा के पास तैनात पुलिसकर्मियों की एक बड़ी टुकड़ी ने मार्च को रोकने के लिए बैरिकेड और भारी बल का इस्तेमाल किया, और प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती से पेश आए। एआईकेएस के त्रिपुरा राज्य सचिव पवित्र कर पर हमला किया गया; उनकी शर्ट फट गई और चश्मा टूट गया।

एक बैठक आयोजित की गई जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस की अनुचित कार्रवाई के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया। विपक्ष के नेता और माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य जितेंद्र चौधरी, एआईकेएस के महासचिव और माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य विजू कृष्णन, एआईएडब्ल्यूयू के राज्य सचिव श्यामल सेन, गणमुक्ति परिषद नेता अघोर देब बर्मन, एआईकेएस नेता रतन दास और अन्य लोगों ने बैठक को संबोधित किया।

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