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गुजरात किसान सभा – 16वां राज्य सम्मेलन
गुजरात किसान सभा का 16वां राज्य सम्मेलन साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर स्थित ‘कॉमरेड सीताराम येचुरी नगर’ में आयोजित किया गया। सम्मेलन की शुरुआत प्रतिनिधियों और किसानों की एक विशाल रैली के साथ हुई, जिसने हिम्मतनगर बस स्टैंड से सम्मेलन स्थल तक लगभग 4 किमी की दूरी तय की। गुजरात किसान सभा के अध्यक्ष दयाभाई गजेरा ने किसान सभा का ध्वज फहराया। इसके बाद शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
सम्मेलन की शुरुआत दिनेशभाई परमार द्वारा रखे गए शोक प्रस्ताव के साथ हुई। स्वागत समिति की अध्यक्षा आशाबेन परमार ने स्वागत भाषण दिया। सम्मेलन का उद्घाटन किसान सभा के वित्त सचिव पी. कृष्णप्रसाद ने किया। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक स्थिति और किसान आंदोलन में किसान सभा की भूमिका का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने आरएसएस-भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र और राज्य सरकार की कॉरपोरेट-परस्त, किसान-विरोधी एवं जन-विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की, जो किसानों को लाभकारी एमएसपी और कर्ज माफी देने से इनकार करने और मजदूर वर्ग पर दमनकारी चार श्रम संहिताओं को थोपने के रूप में सामने आई हैं। उन्होंने आरएसएस-भाजपा की सांप्रदायिक, जातिवादी और सत्तावादी प्रकृति पर हमला बोलते हुए, इस गंभीर खतरे के खिलाफ निरंतर स्वतंत्र और एकजुट संघर्ष का आह्वान किया।

अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ से हितेंद्र भट्ट, सीटू से दह्याभाई जाधव, आशा वर्कर्स यूनियन से अशोक सोमपुरा, आंगनवाड़ी यूनियन से रेखाबेन, एसएफआई से अजय पटेल और डीवाईएफआई से मनीष परमार ने सम्मेलन को शुभकामनाएं सदेश दिए। इसके बाद राज्य महासचिव पुरुषोत्तम परमार ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। चर्चा में 15 साथियों ने भाग लिया और किसान सभा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
क्रेडेंशियल कमेटी की रिपोर्ट महेंद्रसिंह पागी ने पेश की। इसके कुछ मुख्य पहलू इस प्रकार थे:18-35 वर्ष आयु वर्ग केकुल 27साथी थे, 35-45वर्षआयु वर्ग के 32साथी थे, 45-60 वर्ष आयु वर्ग से 36 साथी, 60 वर्ष और उससे अधिक के 42साथी थे । सामाजिक संरचना के लिहाज से 55 ओबीसी,35 एससी, 30 एसटी, 17 सामान्य श्रेणी के साथी थे। शिक्षा स्तर के हिसाब से प्राथमिक – 27, माध्यमिक – 54, एचएससी – 39, कॉलेज – 12 और एलएलबी (LLB) – 5साथी थे।
चर्चा पर सचिव के जवाब के बाद, 27 सदस्यीय नई राज्य समिति का सर्वसम्मति से चुनाव किया गया। समिति ने दयाभाई गजेरा को अध्यक्ष; अरुण मेहता, आशाबेन परमार और भालाभाई खांट को उपाध्यक्ष; पुरुषोत्तम परमार को महासचिव; महेंद्रसिंह पागी एवं नीतीश मोहन को संयुक्त सचिव तथा दिनेश परमार को कोषाध्यक्ष चुना गया।
प्रागजीभाई भांभी, कुबेरभाई भांभी, कंकुबेन, छगनभाई भगोरा और धूलजीभाई बारिया को अरुण मेहता, हितेंद्र भट्ट और कृष्णप्रसाद द्वारा ‘सम्मान पत्र’ देकर सम्मानित किया गया।
सम्मेलन में आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की एक योजना बने गई और 26 नवंबर 2025 तथा 19 जनवरी 2026 को आगामी मजदूर-किसान कार्रवाइयों को सफल बनाने का संकल्प लिया गया।